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Showing posts from August, 2021

ऑनलाइन प्रोग्राम

*ऑनलाइन प्रोग्राम* ✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी* "मैडम, छब्बीस जनवरी के प्रोग्राम का पैसा पेमेंट करवा दीजिए। "लेकिन बैंड वाले को तो छब्बीस जनवरी में विद्यालय बुलाया ही नहीं गया था। "इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। शहर के सबसे प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल में हमारी बैंड पार्टी टीम ही पिछले बारह वर्षों से पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को प्रोग्राम करती रही है। " "अरे भाई, तुम्हें पता नहीं है कि लॉक डॉउन में प्रोग्राम कराने पर प्रतिबंध था।" "इसमें हमारी क्या गलती है ?" "बिना काम के पैसे किस बात का मांग रहे हो।" "लॉक डाउन में बच्चों के लिए स्कूल भी तो बंद रहा, फिर आप मेरे बच्चों का फीस का बिल  किस बात का भेज रहे हो ?" "वो तो ऑनलाइन क्लास हुआ है, इसलिए  फीस देना होगा।" "ठीक है, पंद्रह अगस्त का एडवांस करवा दीजिए, इस बार हमलोग भी ऑनलाइन प्रोग्राम कर देंगे...।"

कर्म का फल (लघु कथा)

*कर्म का फल (लघु कथा)* ✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी* "मां गुब्बारा दिला दो।" "बेटा, गुब्बारा तो कुछ देर में फुट जायेगा।" "खिलौने ही दिलवा दो।" "मेरा बेटा शेर है ना और शेर मिट्टी के खिलौने से नहीं खेलता है।" "अच्छा छोड़ो, आइस्क्रीम ही खरीद दो।" "इससे तो दांत खराब हो जाता है, बेटा।" कुछ दूर आगे बढ़ने पर "मिठाई तो दिलवा दो।" "मिठाई तो पूजा के बाद ही मिलेगा, बेटा।" एक घंटा लाइन में खड़ा रहने के बाद महिला अपने बच्चे के साथ मंदिर के गेट तक पहुंचती है।  "दक्षिणा निकालो, जजमान!" "बाबा मेरे पास सिर्फ पचास रुपए हैं।" "मां के दरबार में झूठ नहीं बोलना चाहिए।" "सच बोल रहा हूं बाबा।" "ठीक है, चल वही निकाल, वैसे भी बाबा को बिना दक्षिणा दिए, पूजा सफल नहीं होता है।" महिला एक नजर अपने बेटे की ओर देखती है। फिर हाथ जोड़ कर मां शेरावाली को देखती है। "अगले पल बाबा को अपने पल्लू से सौ रुपया निकाल कर दे देती है लेकिन मंदिर के अंदर गए बिना वापस लौट आती है।" मंदिर से कुछ दूरी पर ...